उत्तर प्रदेशउत्तराखंडगढ़वाल मण्डलदिल्ली एनसीआरदेश-विदेशयूथरुड़कीशिक्षासामाजिक

उत्तराखंड सूचना आयोग (SIC) ने सुनाया एक अहम फैसला

न्यायाधीशों और अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों से जुड़ी जानकारी को केवल “गोपनीय” होने का हवाला देकर छुपाया नहीं जा सकता। आयोग ने यह निर्णय भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की द्वितीय अपील पर सुनाया।

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत चतुर्वेदी ने 1 जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच subordinate न्यायपालिका से जुड़ी शिकायतों, अनुशासनात्मक कार्रवाई और इससे जुड़े नियमों की विस्तृत जानकारी मांगी थी। उच्च न्यायालय के लोक सूचना अधिकारी ने इसे संवेदनशील और गोपनीय बताते हुए देने से इनकार कर दिया था।

मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ गोपनीयता का हवाला सूचना देने से इनकार करने का औचित्य नहीं हो सकता, खासकर जब यह सार्वजनिक हित और जवाबदेही से जुड़ा हो। आयोग ने निर्देश दिया है कि सक्षम अधिकारी से अनुमति लेकर एक महीने के भीतर संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाए। हालांकि किसी भी न्यायाधीश या अधिकारी की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है और भविष्य में न्यायिक प्रणाली से जुड़ी शिकायतों के बारे में सार्वजनिक डेटा उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button