उत्तर प्रदेशउत्तराखंडदिल्ली एनसीआरदेश-विदेशयूथरुड़कीशिक्षासामाजिकहरिद्वार

राष्ट्रीय युवा दिवस पर देहरादून के ‘द साइलेंट बिस्ट्रो’ में मूक-बधिर युवाओं ने बनाई मिसाल

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर राजधानी देहरादून के सहस्रधारा क्षेत्र में स्थित ‘द साइलेंट बिस्ट्रो’ कैफे का उल्लेखनीय उद्यमीय अनुभव रहा, जहाँ मूक-बधिर युवाओं ने अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और द्रढ़ संकल्प से न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणास्रोत भी बने हैं।

यह कैफे सितंबर 2025 में शुरू हुआ था और आज यह एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। यहां काम करने वाले लगभग 10 में से 7 कर्मचारी मूक-बधिर हैं, जो साइन लैंग्वेज (इशारों की भाषा) में बातचीत कर ग्राहक सेवा प्रदान करते हैं। कैफे की दैनिक गतिविधियों में व्यंजन तैयार करना, परोसना और ग्राहकों के साथ संवाद करना शामिल है, जिसमें हर कदम पर ये युवा अपनी चुनौतियों को संघर्ष एवं आत्मविश्वास में बदलते दिखते हैं।

कैफे की टीम की युवा सदस्य समरीन, जो देहरादून की रहने वाली हैं, ने बताया कि उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित ताज होटल में इंटर्नशिप भी की है, लेकिन संवाद की कठिनाइयों के कारण आगे की नौकरी चुनौतीपूर्ण रही। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और ‘द साइलेंट बिस्ट्रो’ से जुड़कर अपने सपने को नया आयाम दिया। समरीन का सपना पूरी दुनिया में घूमकर अनुभव हासिल करने का है।

कर्मचारी आयुषी और उनकी बहन तनिष्का की कहानी भी प्रेरणादायक है – जहाँ आयुषी मूक-बधिर हैं, वहीं उनकी बहन तनिष्का साइन लैंग्वेज में माहिर होकर टीम को ग्राहकों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि यदि अधिक लोग साइन लैंग्वेज सीखेंगे तो मूक-बधिर लोगों के लिए रोजमर्रा के जीवन में संवाद और सहभागिता और अधिक सुगम हो सकेगी।

यह कहानी दिखाती है कि चुनौतियाँ अवसरों में बदल सकती हैं, जब युवाओं में दृढ़ इच्छाशक्ति, कौशल और आत्मविश्वास हो। ऐसे युवा आज सामाजिक बाधाओं को तोड़कर अपने सपनों को सच करते हुए समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दे रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button