गंगा नगरी हरिद्वार में पावन गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर लगे सौ वर्ष पुराने प्रतिबंध को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हो गई है। हरिद्वार नगरपालिका के बायलॉज में स्पष्ट उल्लेख है कि हर की पौड़ी सहित अन्य प्रमुख गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। यह नियम वर्ष 1916 में ब्रिटिश शासनकाल में लागू किया गया था, जिसे स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1953 में भी यथावत रखा गया।
बायलॉज के अनुसार नियम का उल्लंघन करने पर दस रुपये जुर्माने का प्रावधान है, जो आज भी दस्तावेजों में दर्ज है। हालांकि व्यवहारिक रूप से यह नियम वर्षों से प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाया है। आए दिन हर की पौड़ी और अन्य घाटों पर गैर हिंदुओं की मौजूदगी देखी जाती रही है। हाल के दिनों में गैर हिंदू पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के मंदिरों और घाटों के भीतर कवरेज करने के मामले सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों में नाराजगी देखी गई है।
कुंभ मेले की तैयारियों के मद्देनजर श्री गंगा सभा ने मांग की है कि कुंभ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी 105 गंगा घाटों पर इस बायलॉज को सख्ती से लागू किया जाए। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि गंगा सनातन धर्म की आस्था का केंद्र है और इसकी परंपरा व मर्यादा की रक्षा के लिए गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित होना चाहिए। उन्होंने हरिद्वार और ऋषिकेश को “पवित्र तीर्थ नगरी” घोषित करने की भी मांग की।
इस मांग को संत समाज, अखाड़ा परिषद और पंडा समुदाय का समर्थन मिल रहा है। अवधूत आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर रुपेंद्र प्रकाश जी महाराज ने कहा कि गंगा घाटों की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंध केवल कुंभ तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी रूप से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कुंभ क्षेत्र से मांस और मदिरा की दुकानों को हटाने की भी मांग की।
निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि यदि कुंभ क्षेत्र को “पवित्र सनातन क्षेत्र” घोषित किया जाता है तो इससे श्रद्धालुओं की आस्था और मजबूत होगी। वहीं बड़ा अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज और साध्वी प्राची ने भी इस पहल को सनातन परंपरा की रक्षा की दिशा में आवश्यक कदम बताया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हरिद्वार और ऋषिकेश राज्य के प्रमुख गंगा तीर्थ स्थल हैं। राज्य सरकार इनकी पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि कुंभ से पहले गंगा घाटों को लेकर एक व्यापक योजना पर काम चल रहा है और श्री गंगा सभा की मांगों का अध्ययन कर उचित निर्णय लिया जाएगा।




