डिजिटल इंडिया मिशन को 10 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में अपनी उपलब्धियों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार अब हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल सेवाएँ और रोजगार संभावनाएँ देश के दूरदराज के गांवों तक पहुंच चुकी हैं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि डिजिटल इंडिया केवल तकनीक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने गांवों में रोज़गार और सेवाओं के नए दरवाज़े खोले हैं।
मुख्य उपलब्धियाँ
ग्रामीण सेवाओं का डिजिटल हब – CSC:
अब तक 5.67 लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पूरे देश में सक्रिय हैं, जिनमें से 4.41 लाख से ज़्यादा सीधे ग्राम पंचायत स्तर पर काम कर रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को 800 से अधिक सरकारी और बिजनेस सेवाएँ आसानी से मिल रही हैं।
भारतनेट के ज़रिए इंटरनेट पहुंच:
‘भारतनेट’ परियोजना ने 2,14,843 से अधिक ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ा है। इन स्थानों पर वाई-फाई हॉटस्पॉट और फाइबर-टू-होम (FTTH) कनेक्शन स्थापित किये जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा मिल रहा है।
डिजिटल साक्षरता अभियान:
‘प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान’ के तहत 6.39 करोड़ ग्रामीणों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया गया, जिससे स्मार्टफोन और कंप्यूटर इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ी है।
युवाओं के लिए कौशल विकास:
फ्यूचरस्किल्स प्राइम प्रोग्राम के तहत 15.78 लाख से अधिक युवाओं ने नई टेक्नोलॉजी में नामांकन लिया, जिसमें करीब 41% महिलाएँ भी शामिल हैं।
डिजिटल सेवाओं की विविधता:
डिजिटल इंडिया के तहत DigiLocker, UPI, UMANG App और GeM Portal जैसी सेवाओं ने सरकारी सुविधाओं को तेज़, पारदर्शी और सुलभ बनाया है।
सरकारी दावे और आगे की राह
सरकार का मानना है कि डिजिटल इंडिया ने ग्रामीण और शहरी भारत के बीच की डिजिटल खाई को कम किया है और लोगों को सूचना-तकनीक से जोड़ा है। इस मिशन से न केवल रोज़गार के अवसर बढ़े हैं बल्कि गवर्नेंस और वित्तीय समावेशन को भी मजबूती मिली है।
विश्लेषकों के अनुसार, इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सरकारी सेवाओं में बदलाव लाया है, जिससे ग्रामीण भारत भी डिजिटल बदलाव की मुख्यधारा में शामिल हो रहा है।




