क्या बदला है: Uttarakhand Labour Department ने घोषणा की है कि अब महिलाएं रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक (रात्रि पाली) काम कर सकती हैं।
ज़रूरी शर्तें: रात्रि पाली के लिए हर महिला कर्मचारी से उसकी लिखित सहमति लेना अनिवार्य होगा; अगर महिला मना करती है, तो उसे काम के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
सुरक्षा व सुविधाएँ: नियोक्ता (कंपनी/दुकान आदि) को कर्मचारियों का विभिन बाध्य–व्यवस्था जैसे — पिक-अप/ड्रॉप व्यवस्था, पैनिक बटन या जीपीएस-आधारित परिवहन, पुलिस हेल्पलाइन व थाना/चौकी नंबर, सीसीटीवी, शौचालय, बदलने का कमरा, पेयजल आदि सुनिश्चित करना होगा।
औपचारिक रूप से लागू: यह निर्णय राज्य कैबिनेट के आदेश के बाद लिया गया है; अब इसे लागू कर दी गई अधिसूचना के तहत माना गया।
महत्व: इस कदम के पीछे मकसद है — महिलाओं को रोजगार के अवसर बढ़ाना और उन्हें समान आधार पर काम करने का अवसर देना, साथ ही उनकी सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना।
“अब रात की पारी महिलाओं के लिए खुली — देहरादून से नए आदेश”
देहरादून, 10 दिसंबर 2025 — उत्तराखंड सरकार ने महिलाओं के काम करने के पुराने समय-सीमित आदेश में बदलाव करते हुए रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक काम की इजाजत दे दी है। नया आदेश तभी लागू होगा, जब महिला कर्मचारी अपनी लिखित सहमति देगी। इसके साथ ही नियोक्ताओं को परिवहन, सुरक्षा, सीसीटीवी, शौचालय आदि की व्यवस्थाएं करनी अनिवार्य होंगी। इस बदलाव से महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और समान अवसर सुनिश्चित होंगे, मगर सुरक्षा व सुविधा की जिम्मेदारी अब नियोक्ताओं पर होगी।
किन बिंदुओं पर पत्रकार या पाठक ध्यान दे सकते हैं
इस फैसले से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है, ख़ासकर उन व्यवसायों में जिनमें अब तक रात की पाली संभव नहीं थी।
दूसरी ओर, कानून मात्र कागज़ों तक सिमट न जाएं — असल में पिक-अप-ड्रॉप, सुरक्षा, सुविधाएँ आदि की व्यवस्था कैसे हो रही है, इस पर निगरानी ज़रूरी होगी।
इसके साथ-साथ, यह देखना दिलचस्प होगा कि महिलाएं स्वयं इस सुविधा को कितनी स्वीकारती हैं — रात में काम करना उनकी ज़रूरत, सुविधा या मजबूरी, इन पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए।




