देहरादून। सोमवार को राजधानी देहरादून में उत्तराखंड महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता-संघ ने इस मोर्चे पर मोर्चा खोल दिया जब उन्होंने बेरोजगार नर्सों के साथ कथित मारपीट के विरोध में सचिवालय की ओर मार्च किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग कर रोक दिया और कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर एकता विहार ले गई।
इस हफ़्ते की शुरुआत में, बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों — जैसे कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, आयु सीमा में छूट, वर्ष-वार भर्ती व्यवस्था आदि — को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था।
इसी बीच, एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा एक नर्सिंग उम्मीदवार को थप्पड़ मारने और धक्कामुक्की की घटना हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ — जिससे नाराज प्रदर्शनकारी और भी उत्साहित हो उठे।
आक्रोशित नर्सिंग बेरोजगारों की मांगों का समर्थन करते हुए, महिला कांग्रेस की ओर से कूच का नेतृत्व ज्योति रौतेला ने किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ अपनी नाराज़गी जताई।
पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई, फिर कई को हिरासत में लेकर एकता विहार ले जाया गया। प्रदर्शनकारियों में आक्रोश है कि शांतिपूर्ण मांग को दमन से टाला गया।
प्रदर्शनकारी — जो खुद “नर्सिंग एकता मंच” से जुड़े हैं — की मुख्य मांगें हैं:
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और परीक्षा-आधारित चयन की बजाय वर्ष-वार मेरिट आधारित भर्ती।
पहले से लंबित रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति।
पुलिस की मारपीट और अभद्र व्यवहार के लिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई।
महिला कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल एक भर्ती का मसला नहीं है — बल्कि बेरोजगार युवाओं की आवाज़ दबाने की कोशिश है।
इस कदम से सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठे हैं — कि जब युवाओं की legítimate मांग हो, और वे शांतिपूर्ण तरीके से आवाज़ उठा रहे हों, तो उस आवाज़ को दबाने की कोशिश क्यों?
कुछ लोगों का मानना है कि बिना सुनवाई और संवाद के दमन से असंतोष और बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, नर्सिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अस्थिरता से स्वास्थ्य सेवाओं और युवाओं के भरोसे पर असर पड़ सकता है।




