(संवाद) — हरिद्वार पुलिस और सीआईयू (CIU) की टीम ने एक सनसनीखेज हत्या-मामले का पर्दाफाश किया है। मृतक थे 62 वर्षीय रिटायर्ड वायुसेना कर्मचारी भगवान सिंह, और तल्खी का कारण बनी थी उनकी करोड़ों की संपत्ति। पुलिस के अनुसार, हत्या की साज़िश उनके ही बेटे यशपाल ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर रची थी।
शुरुआत में बेटे ने पुलिस को बताया था कि वे अपने पिता के साथ एक शादी समारोह में जा रहे थे; रास्ते में एक युवक ने लिफ्ट लेने की मांग की, जिसे उनकी कार में बिठाया गया। कुछ ही मिनटों बाद उस युवक ने गोली चला दी।
लेकिन पुलिस पूछताछ में बेटे का बयान बदल गया — उसने शादी का नाम देने में ठोस जवाब नहीं दिया। फिर शक उसी की ओर गया।
दबाव में यशपाल टूटा और स्वीकार किया कि पिता की हत्या उसने अपने दो दोस्तों — ललित मोहन (उर्फ राजन) और शेखर — के साथ मिलकर कराई थी। अपराध के एवज में उसे 30 लाख रुपये और एक स्कॉर्पियो (कार) देने का वादा हुआ था।
पुलिस का कहना है कि motive आर्थिक और संपत्ति विवाद था — वर्षों से बेटे और पिता के बीच संपत्ति अपने नाम कराने की मांग को लेकर तनाव था। पुत्रीय दबाव और गलत संगत के चलते, जब पिता ने साफ मना कर दिया, तो बेटे ने हत्या की साज़िश रची।
पुलिस ने यशपाल, ललित मोहन और शेखर — तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
मुख्य आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पिस्तौल, एक खोखा कारतूस, तथा वारदात के समय पहनी गई कपड़े-जूते बरामद हुए।
प्रतिक्रिया: इस घटना ने यह स्पष्ट किया कि कभी-कभी “बाहर के बदमाशों” की बजाय परिवार का अपना कोई सदस्य ही खौफनाक अपराध का मुख्य साज़िशकर्ता हो सकता है। मामले ने न सिर्फ हरिद्वार में सनसनी फैलाई है, बल्कि वरियता व सम्मान से जुड़ी मौलिक मान्यताओं को झकझोर दिया है




