जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख महमूद मदनी द्वारा भोपाल में दिए गए बयान पर ताज़ा प्रतिक्रिया करते हुए, शाहबुद्दीन रज़वी ने इसे “समाज को बांटने वाला” और “भड़काऊ” बताया।
रज़वी ने अपील की कि मुसलमान इस तरह के “उल-जुलूल बयान” से खुद को बचाएं, और ऐसे Provocative बयानों पर ध्यान न दें।
मदनी ने एक सभा में कहा था — “जब-जब ज़ुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा” — और सुप्रीम कोर्ट तथा सरकार से सवाल उठाए थे।
उनकी यह टिप्पणी देश में बहस का विषय बनी, और इसे कुछ लोगों द्वारा अल्पसंख्यकों को उकसाने वाला माना गया।
रज़वी ने कहा कि मदनी का बयान “देश में अमन-चैन को खतरे में डालने”, “कानून व्यवस्था को प्रभावित करने” तथा “मुसलमानों में पिछले भरोसे को डगमगाने” वाला है।
उनका कहना है कि मुस्लिम समुदाय को ऐसी बयानों से दूर रहना चाहिए, और संवेदनशील मामलों में संयम बरतना चाहिए।
देश में मदनी के बयान पर व्यापक प्रतिक्रिया देखी जा रही है; राजनीतिक दल और नागरिक समाज इसे सुरक्षा व सौहार्द्र के लिए खतरनाक बता रहे हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए धर्म-आधारित सद्बुद्धि और सावधानी की अपील हो रही है।




