हाल ही में Amar Ujala में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरकाशी जिले के Purola (मोरी ब्लॉक) के जखोल गांव के जाबिल्च-टोके इलाके में देर रात हिमालयी काले भालू ने अचानक बस्ती में घुसकर कई मकानों व छानीयों के दरवाजे तोड़ दिए।
भालू द्वारा दरवाजे टूटने की आवाज सुनकर ग्रामीण भय के साये में घरों में दुबक गए; किसी को सुरक्षित रात बिताना मुश्किल रहा।
गाँव वालों का कहना है कि भालू पिछले कई दिनों से आसपास दिख रहा था, और पहले मवेशियों पर हमले कर चुका था — इस बार उसने हाथ आगे बढ़ाया।
ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग से इस भालू को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर ले जाने, गांव में गश्त बढ़ाने, व प्रभावितों के मुआवजे की मांग की है।
इस साल उत्तराखंड में भालुओं का आक्रामक व्यवहार बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनियमित मौसम, कम बर्फबारी और बदलती जलवायु की वजह से भालू समय पर शीतनिद्रा नहीं ले पा रहे हैं — जिससे 2025 में मानव-भालू संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं।
25 साल के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इतने वर्षों में सैकड़ों हमले और दर्जन-डो दुर्घटनाएं हो चुकी हैं; इस साल भी 71 हमले और 7 मौतें दर्ज हुई हैं।
यह घटना अकेली नहीं है — उत्तरकाशी व आसपास के जिलों में पिछले कुछ महीनों में कई हमले, पशु व मानव क्षति के मामले सामने आए हैं।
ग्रामीणों में भय का माहौल है; कई जगह लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ी दुर्घटना की संभावना साफ दिख रही है।
प्रभावित ग्रामीणों का अनुरोध है कि वन विभाग (Forest Department) तुरंत टीम भेजकर भालू का पता लगाए, गांवों में रात की गश्त बढ़ाए और खतरा टालने के लिए प्रभावी कदम उठाए।
साथ ही भालुओं के हमले की घटनाओं के मुआवजे की प्रक्रिया तेज की जाए, और साथ-साथ ऐसी रणनीति बनाए जाए ताकि भविष्य में मानव-वन्य जीव संघर्ष को रोका जा सके
निष्कर्ष: उत्तरकाशी के जखोल गांव में भालू द्वारा रात में घरों के दरवाजे तोड़े जाना इस बात का संकेत है कि हिमालयी काले भालुओं का व्यवहार अब पहले से कहीं अधिक उग्र हो चुका है। 2025 में उत्तराखंड में मानव-भालू संघर्ष तेजी से बढ़ा है — इससे न केवल ग्रामीणों की जान-पहचान व संपत्ति पर खतरा है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी यह चिंता का विषय है।




