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देहरादून: फेसबुक दोस्ती से शुरू हुआ सफर — त्यूणी की रीना बनी “फरज़ाना”, पकड़े गए पति-पत्नी

देहरादून, 24 नवम्बर 2025 — देहरादून पुलिस ने ऑपरेशन कालनेमी के तहत एक बड़े पहचान धोखाधड़ी और अवैध प्रवास का खुलासा किया है। पुलिस ने बांग्लादेशी युवक ममून हसन (28) और त्यूणी निवासी रीना चौहान को गिरफ्तार किया है। आश्चर्य की बात यह है कि रीना ने बांग्लादेश में धर्म परिवर्तन कर फरज़ाना अख्तर नाम अपना लिया था

ममून हसन ने सचिन चौहान का नाम और पहचान उपयोग कर फर्जी पहचान पत्र बनवाए थे — जिसमें आधार कार्ड, पैंकार्ड, वोटर कार्ड जैसी सरकारी दस्तावेज़ें शामिल थीं।

उसकी और रीना की जोड़ी देहरादून में पति-पत्नी की तरह रह रही थी, लेकिन उनकी सच्ची पहचान छिपी हुई थी।

2. फेसबुक से शुरू हुआ रिश्ता

दोनों की मुलाकात फेसबुक पर हुई थी। ममून ने 2019, 2020 और 2021 में टूरिस्ट वीजा पर भारत आ-जा कर रीना से मिलना जारी रखा।

कोरोना के दौरान उनका वीजा खत्म हो गया, लेकिन बाद में ममून और रीना अवैध रूप से बांग्लादेश गए और वहां निकाह किया।

3. धर्म परिवर्तन का खुलासा

बांग्लादेश में बने दस्तावेजों के मुताबिक, रीना का नाम फरज़ाना अख्तर दर्ज है।

वहीं, भारत में रीना हिंदू परिधान और मंगलसूत्र पहनती थी, लेकिन बांग्लादेश में बुर्का में दिखाई दी।

यह मामला सिर्फ पहचान धोखाधड़ी नहीं है — पुलिस इसे धर्मांतरण, फर्जी दस्तावेज़, और अवैध आव्रजन की बड़ी साजिश मान रही है।

4. क़ानून कार्रवाई

देहरादून पुलिस (SSP अजय सिंह) के अनुसार, ममून और रीना के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएँ लागू की गई हैं, जैसे कि धारा 420 (ठगी), 467, 468, 471, 120B, साथ ही पासपोर्ट एक्ट और विदेशियों अधिनियम के अंतर्गत भी मामला दर्ज किया गया है।

जांच अभी जारी है, और पुलिस अन्य लोगों की भूमिका — जिन्होंने फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने में मदद की — की गहरी छानबीन कर रही ह

इस मामले ने लव जिहाद (प्रेम के बहाने धर्म परिवर्तन) जैसी संवेदनशील और विवादित चर्चाओं को फिर से हवा दी है।

यह घटनाक्रम यह संकेत देता है कि अवैध आव्रजन और पहचान धोखाधड़ी के बड़े नेटवर्क हो सकते हैं, जिसे राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों द्वारा गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

पुलिस को यह भी देखना होगा कि ऐसे मामलों में सामाजिक-सांस्कृतिक जटिलताएँ कितनी ख़तरनाक दिशा ले सकती हैं — न सिर्फ कानूनी दृष्टि से, बल्कि समाज में धर्म और पहचान के स्तर पर भी।

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