हरिद्वार, श्रीजी वाटिका में संतों की महत्वपूर्ण बैठक साधु समाज की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को श्रीजी वाटिका, प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम में गुरू मंडल आश्रम के पीठाधीश्वर महंत भगवत स्वरूप महाराज की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में संगठन को और अधिक सक्रिय, मजबूत और व्यापक बनाने को लेकर विस्तृत मंथन किया गया।
बैठक में सर्वसम्मति से स्वामी सत्यव्रतानंद सरस्वती को भारत साधु समाज का प्रदेश अध्यक्ष, विनोद गिरी महाराज को महामंत्री तथा स्वामी अमृतानंद महाराज को प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया गया। संतों ने संगठन की एकजुटता, धर्म संरक्षण, सामाजिक समरसता और सेवा कार्यों को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
इस दौरान प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम के पीठाधीश्वर महंत महामंडलेश्वर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश महाराज ने कहा कि महाकुंभ और अर्धकुंभ का आयोजन सनातनियों की आस्था से जुड़ा है और इसके पौराणिक स्वरूप से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि स्नान पर्वों का निर्णय संत समाज की सहमति से होता है और शासन-प्रशासन का कार्य केवल व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
उन्होंने अखाड़ा परिषद के अस्तित्व पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि “वर्तमान में अखाड़ा परिषद का कोई अस्तित्व नहीं है, ऐसे में मेला संबंधी निर्णय लेने का कोई अधिकार भी नहीं है।”
बैठक में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी महाराज ने आरोप लगाया कि सरकारी धन के दुरुपयोग के उद्देश्य से हरिद्वार के अर्धकुंभ को पूर्ण कुंभ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में नासिक में पूर्ण कुंभ होना है, इसलिए संत समाज के लिए दोनों स्थानों पर स्नान पर्वों की व्यवस्थाओं में उलझना कठिन होगा।
इसके साथ ही उन्होंने हरिद्वार में नशामुक्ति अभियान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “यहां दुर्भाग्य है कि नशे का कारोबार करने वाले ही नशामुक्ति अभियान चला रहे हैं।”
नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष स्वामी सत्यव्रतानंद सरस्वती ने कहा कि वे अपने कार्यकाल में भारत साधु समाज को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास करेंगे। बैठक में संगठनात्मक ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका अक्षरशः पालन किया जाएगा।
बैठक में महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी श्याम प्रकाश, महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद गिरी, स्वामी राजकुमार दास, स्वामी प्रकाशानंद, स्वामी विरेन्द्र गिरी, मोतीराम गिरी, स्वामी कैलाशानंद गिरी, शुभम गिरी, तथा डॉ. विशाल गर्ग सहित अनेक संत एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का संचालन राष्ट्रीय प्रवक्ता महामंडलेश्वर विवेकानंद सरस्वती ने किया।




