उत्तराखंड सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा घोषित “उत्तराखंड एआई मिशन (यू–एआईएम)” के अंतर्गत गुरुकुल कांगड़ी (मानित विश्वविद्यालय), हरिद्वार के कंप्यूटर विज्ञान विभाग में “उत्तराखंड एआई मिशन–चैप्टर” की स्थापना के बाद पहला उभरती प्रौद्योगिकी-आधारित हैकथॉन “उद्भव–25” सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
हैकथॉन में छात्रों की दस टीमों ने उत्तराखंड की विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान हेतु नवीन तकनीक-आधारित परियोजनाएँ प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. महेंद्र सिंह असवाल ने ‘उद्भव’ की अवधारणा और मिशन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT), हरिद्वार के निदेशक अनुराग कुमार ने कहा कि एआई, एमएल, IoT और GIS जैसी उभरती तकनीकें उत्तराखंड की समस्याओं— विशेषकर स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और दुर्गम क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुँच—के समाधान में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षण संस्थानों में नवोन्मेष और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए तकनीकी क्षमताओं का विस्तार कर रही है। विशिष्ट अतिथि विभागाध्यक्ष प्रो. करमजीत भाटिया ने विद्यार्थियों को अधिक अनुसंधान-उन्मुख और समस्या समाधानकर्ता बनने का आह्वान किया।
विजेता टीमों की तकनीकी प्रस्तुतियाँ
प्रथम स्थान: बी.टेक. सीएसई के मोव्वा राकेश सिद्धवरम, नवीन कुमार और आर.पी. लतीश रॉय की टीम ने “ह्यूमन हेल्थ मॉनिटरिंग ऐप” प्रस्तुत किया, जो उत्तराखंड की आम जनता के लिए किफायती डिजिटल स्वास्थ्य सेवा समाधान प्रदान करेगा।
द्वितीय स्थान: बी.टेक. के हर्ष चौरसिया और ऋषभ चौरसिया की टीम “टेक्नो” ने दुर्गम क्षेत्रों में बचाव सामग्री और अग्निशमन उपकरण पहुँचाने हेतु ‘एआई-संचालित हैवी लिफ्ट ड्रोन तकनीक’ प्रस्तुत की।
तृतीय स्थान: एमसीए तृतीय सेमेस्टर के अनिकेत सामंत ने “सतत पहाड़ी कृषि के लिए स्मार्ट फसल सलाहकार प्रणाली” का विचार प्रस्तुत किया, जो किसानों को रियल-टाइम फसल मार्गदर्शन और मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएगा।
अन्य प्रतिभागियों—अक्षत गोंड, वैभव चौहान, नीरज सिंह, रोहित, रितिक, प्रवीण गुप्ता, बिक्रम सिंघा, प्रमोद सिंह और राजीव रंजन—ने भी अपने तकनीक-आधारित नवाचार प्रस्तुत किए।
निर्णायक मंडल में प्रो. करमजीत भाटिया, डॉ. राजकुमार (एसोसिएट प्रोफेसर) और श्री निखिल रंजन (वरिष्ठ परियोजना समन्वयक, NIELIT) शामिल थे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. विवेक कुमार, डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. श्वेतांक तथा प्रशासनिक टीम के सदस्य—मनीष अग्रवाल, संजय कुमार और संदीप—का महत्वपूर्ण योगदान रहा।




