एस.एम.जे.एन. पी.जी. कॉलेज, हरिद्वार में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा उत्तराखंड स्थापना रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव दिवस पर टाउन हॉल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर श्रद्धांजलि के साथ हुई।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस, आदिवासी जननायकों के बलिदान और शौर्य को स्मरण करने का दिन है। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष और प्राचीन सामाजिक संरचनाओं में जनजातियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रो. बत्रा ने कहा कि युवा पीढ़ी को जनजातीय इतिहास और संस्कृति के बारे में जानना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भगवान राम के समय भी विभिन्न जनजातियों—जैसे निशादराज, भील, वानर आदि—का सहयोग प्रमुख रूप से प्राप्त हुआ था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता प्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रो. भगवान सिंह बिष्ट ने कहा कि जनजातियाँ भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा का अभिन्न अंग रही हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज में जागरूकता बढ़ाकर आदिवासी संस्कृतियों का संरक्षण संभव है और उनके जीवन स्तर में सुधार कर उन्हें राष्ट्र की विकास यात्रा में सशक्त भागीदार बनाया जा सकता है।
समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. जे.सी. आर्य ने कहा कि जनजातियों ने स्वतंत्रता संग्राम, सांस्कृतिक विविधता, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक कृषि ज्ञान सहित कई क्षेत्रों में अमूल्य योगदान दिया है।
छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं IQAC समन्वयक डॉ. संजय कुमार माहेश्वरी ने कहा कि जनजातीय समुदायों की कला, शिल्प और हस्तकला ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, और आज भी वे राष्ट्रीय विकास और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुषमा नयाल ने किया।
इस अवसर पर प्रो. विनय थपलियाल, डॉ. शिवकुमार चौहान, डॉ. मनोज कुमार सोही, डॉ. वंदना सिंह, डॉ. सरोज शर्मा, डॉ. विनीता चौहान, डॉ. पुनीता शर्मा, डॉ. पद्मावती तनेजा, डॉ. गीता शाह सहित कई शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।




