प्रदेश में देवभूमि परिवार योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के परिवारों को एक निश्चित पहचान-आईडी प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम के कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन संबंधित मामलों के लिए मंत्रिमंडल की एक उप-समिति गठित की जाएगी, जो दो माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
तदर्थ, संविदा तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर भी एक उप-समिति बनेगी, जो कट-ऑफ डेट सहित अन्य नियम तैयार करेगी।
उत्तarakhand प्लेसमेंट नर्सिंग अंडर लेबल (UPNAL) के माध्यम से अब विदेशों में भी रोजगार उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया।
आपदा में मारे गए आश्रितों को अब 4 लाख की बजाय 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, तथा पक्का मकान ध्वस्त होने की स्थिति में 5 लाख की सहायता प्रदान की जाएगी।
इन निर्णयों से राज्य के सामाजिक-आर्थिक स्वरूप में परिवर्तन की दिशा मिल सकती है।
विशेष रूप से, नियमितीकरण एवं संविदा कर्मियों की स्थिति पर उठाए गए कदम से कार्यबल में स्थायित्व आएगा, और परिवार योजना तथा पहचान प्रणाली से सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यवाही की गति, समय-सीमा और कार्य-योजना की स्पष्टता से यह सुनिश्चित होगा कि जनता को शीघ्र लाभ मिल सके।
भविष्य में इन योजनाओं का क्रियान्वयन व परिणाम खबरों का प्रमुख विषय बनेगा।




