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सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से ही संभव है सर्वांगीण विकास

एस.एम.जे.एन. महाविद्यालय में उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित उत्तराखंड राज्य महोत्सव कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत सोमवार को रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति, भौगोलिक विशेषताओं और आर्थिक जीवन को रंगों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

 

बीए प्रथम सेमेस्टर की छात्राएं तृप्ति और कनिष्का प्रथम स्थान पर रहीं। मालती, शिखा, काजल चौहान और गुंजन को संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान मिला, जबकि तान्या, अनुष्का, निक्की, सिमरन, तथा दिव्यांशु और अदिति को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। निहारिका, टिया, मोनिका कोठियाल और जानवी कपूर को ईगास बग्वाल पर आधारित रंगोली के लिए विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया।

 

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार बत्रा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “हमारी सांस्कृतिक पहचान ही हमारी असली शक्ति है, जिसे हमें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना होगा।”

 

अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय कुमार माहेश्वरी ने कहा कि रंगोली प्रतियोगिता छात्रों की लोक संस्कृति के प्रति बढ़ती रुचि और संवेदनशीलता का प्रतीक है।

 

प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका डॉ. मीनाक्षी शर्मा, डॉ. पल्लवी शर्मा और दीपिका आनंद ने निभाई, जबकि डॉ. पूर्णिमा सुंदरियाल, डॉ. मोना शर्मा और श्रीमती रिचा मिनोचा संयोजक रहीं। सह-संयोजक डॉ. अमित मल्होत्रा और गौरव बंसल थे।

 

कार्यक्रम की थीम में एपन आर्ट, ईगास बग्वाल, नंदा देवी राजजात, फूलदेई तथा लोकसंस्कृति को शामिल किया गया।

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