देहरादून — राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित दो-दिवसीय विशेष सत्र में द्रौपदी मुर्मू द्वारा सदन को संबोधित किए जाने सहित सभागार में पारंपरिक पोशाक एवं स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों ने माहौल को यादगार बना दिया।
यह सत्र राज्य के रजत-जयंती समारोह के तहत आयोजित हुआ, जिसे विशेष महत्व दिया गया।
सभा में तमाम विधायक, नेता-प्रतिनिधि सहित अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने भी पहाड़ी टोपी, पिछौड़ा और पारंपरिक नथ के साथ उपस्थित होकर स्थानीय संस्कृति का प्रतीक प्रस्तुत किया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में विकास यात्रा, युवाओं की भूमिका और आगे की दिशा पर बल दिया।
सदन में भाजपा के सभी नेता-विधायक भी पारंपरिक टोपी में दिखे, जिससे इस समारोह में सांस्कृतिक स्वामित्व का संदेश भी गया।
यह सत्र इसलिए भी ऐतिहासिक था क्योंकि इसे राज्य के 25 वर्ष पूरे होने की उपलब्धि के साथ-साथ आने वाले 25 वर्ष की रणनीति पर विचार के रूप में देखा गया।
राज्य स्थापना के रजत-जयंती सत्र ने सिर्फ नीति-निर्धारण का मंच नहीं, बल्कि वहाँ की सांस्कृतिक पहचान और गरिमा को भी केंद्रीय रूप से दर्शाया। सभागार में पहाड़ी टोपी, पिछौड़ा, नथ और स्थानीय कलाकृति-स्मृति-चिह्न जैसे तत्व एक जीवंत प्रतीक रहे।




