वर्ष 2026 (FY26) में जीएसटी से होने वाला राजस्व सरकार के बजटीय अनुमान से भी अधिक रहेगा।
यह पूर्वानुमान इस बात को ध्यान में रखकर किया गया है कि सितंबर 2025 में लागू कर दरों के पुनर्गठन के बावजूद राज्यों को “नेट गेनर” यानी लाभार्थी बने रहने की स्थिति है।
दरों के पुनर्गठन के तहत अब जीएसटी की चार मुख्य श्रेणियाँ हैं: 0 %, 5 %, 18 % और 40 % (लक्ज़री तथा पाप वस्तुओं के लिए) ।
उदाहरण के तौर पर, रिपोर्ट में बताया गया कि महाराष्ट्र को करीब 6 % लाभ हो सकता है और कर्नाटक को करीब 10.7 % तक की बढ़ोतरी का अनुमान है।
अक्टूबर 2025 में कुल जीएसटी संग्रह लगभग ₹1.95 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के समान माह में ₹1.87 लाख करोड़ रुपये था — यानी वार्षिक आधार पर 4.6 % की वृद्धि।
अप्रैल से अक्टूबर 2025 के दौरान जीएसटी संग्रह अप्रैल-अक्टूबर अवधि में 9.0 % की वृद्धि के साथ लगभग ₹13.89 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में ₹12.74 लाख करोड़ रुपये दर्ज था।
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अर्थ एवं संभावित प्रभाव
इस रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का उपभोक्ता व व्यय-चक्र बेहतर बनी हुई है, जिससे जीएसटी-संग्रह को गति मिली है।
कर दरों के पुनर्गठन के बावजूद राजस्व न केवल गिरा नहीं बल्कि सुधार की ओर है — यह कर प्रणाली की स्थिरता एवं क्षमता का संकेत है।
राज्यों के लिए यह अच्छी खबर है — क्योंकि नए व्यवस्था में उन्हें “नेट गेनर” बने रहने की संभावना है, जिससे राज्यों की वित्त-स्थिति मजबूत हो सकती है।
केंद्र सरकार के लिए इसका मतलब है कि बजट लक्ष्यों पर पकड़ बनी रहने की संभावना है — वित्तीय वर्ष में राजस्व-गैप की चुनौतियाँ कम-से-कम इस पर आधारित हो सकती हैं।
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⚠️ ध्यान देने योग्य बातें
हालांकि मॉडल सकारात्मक है, लेकिन रिपोर्ट यह भी कहती है कि दरों में बदलाव के बाद कुछ महीनों में अस्थायी गिरावट (लगभग 3-4 % मासिक) देखने को मिल सकती है — लेकिन उसके बाद 5-6 % मासिक वृद्धि की प्रवृत्ति बनी है।
अलग-अलग राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में जीएसटी-रचनाओं और उनकी क्रियान्वयन की गति में अंतर हो सकता है — जिससे वास्तविक संग्रह पर प्रभाव पड़ सकता है।
दरों के पुनर्गठन (0 %, 5 %, 18 %, 40 %) से कुछ वस्तुओं में कर घटने व कुछ में बढ़ने का संतुलन देखना होगा — इससे उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव हो सकता है।




