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चीन ने एआई नए मंच को लेकर किया बड़ा प्रस्ताव

दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू में चल रहे Asia‐Pacific Economic Cooperation (APEC) शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग ने एक वैश्विक एआई सहयोग संगठन बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को “मानवता की भलाई के लिए वैश्विक संपत्ति” बनाया जाना चाहिए।

 

मुख्य बिंदु:

 

शी जिनपिंग ने कहा कि एआई के विकास में सभी देशों का समावेश होना चाहिए, और इसे सिर्फ एक देश-विशेष के नियंत्रण में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

 

चीन ने सुझाव दिया कि इस नए संगठन का मुख्यालय संभवतः शंघाई में हो सकता है।

 

इस प्रस्ताव का मंच उन्होंने तब चूना, जब अमेरिका की भूमिका सीमित नजर आई—इस बार APEC में डोनाल्ड ट्रम्प की उपस्थिति नहीं रही।

 

चीन यह संकेत देना चाहता है कि एआई-तकनीक और नियम-निर्माण में वह आने वाले समय में सक्रिय भूमिका निभाएगा — और यह कि तकनीकी प्रभुत्व अब सिर्फ पश्चिमी देशों के हाथ में नहीं रहेगा।

 

 

इस प्रस्ताव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि एआई-तकनीक चाहे चिपसेट्स हों, या मॉडल निर्माण हों — इन पर नियंत्रण उत्कृष्टता वाले देशों के हाथ में है। चीन इस दिशा में “एल्गोरिदमिक संप्रभुता” (algorithmic sovereignty) की ओर कदम बढ़ा रहा है ताकि वो अपने डेटा-टेक्नोलॉजी पर अधिक नियंत्रण रख सके।

 

अर्थ एवं संभावना:

 

अगर यह संगठन बना, तो एआई पर वैश्विक नियम-निर्माण में चीन का भाग बढ़ सकता है।

 

अमेरिका ने पहले कहा है कि बहुत सख्त अंतरराष्ट्रीय नियम नवाचार (innovation) को बाधित कर सकते हैं — इस वजह से अमेरिका इस प्रस्ताव से पूरी तरह सहमत नहीं है।

 

इस प्रकार यह एक तकनीकी एवं राजनीतिक मोड़ हो सकता है जहाँ एआई-बहुराष्ट्रीय सहयोग के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं।

 

भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देश इस प्रस्ताव को अपने हितों के परिप्रेक्ष्य में देख सकते हैं — चाहे वह एआई-टेक्नोलॉजी में साझेदारी हो, या नियम-नियमन में भागीदारी।

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