दिल्ली / देहरादून, 21 अगस्त 2025 – पिथौरागढ़ जिले के दूरदराज गाँव पसमा की रहने वाली बबीता सिंह ने नैसर्गिक चुनौतियों और पलायन की तेज़ रफ्तार को अवसर में बदलकर एक नया सामाजिक व आर्थिक मॉडल तैयार किया। उन्होंने उस धरती को सजीव बनाया, जहां खेती पर निर्भरता के बावजूद लोग आजीविका के साधन न पाकर संघर्ष कर रहे थे।
मुख्य बिंदु:
विचलित कर देने वाला दृश्य
2021 में जब बबीता अपने पैतृक गांव पहुँचीं, तो वहाँ की बंजर ज़मीन, बेरोज़गारी और निराशाजनक परिस्थितियों ने उन्हें प्रभावित किया। उन्होंने तय किया कि किसी भी महिला को रोजगार की तलाश में गांव छोड़ना नहीं पड़ेगा।
नवाचार कृषि का रास्ता
पारंपरिक खेती के साथ–साथ उन्होंने दमास्क गुलाब, कैमोमाइल, रोज़मेरी, करी पत्ता जैसी सुगंधित और औषधीय फसलों की खेती शुरू की—जो जलवायु अनुकूल, जंगली जानवरों से सुरक्षित और बाजार में लोकप्रिय थीं।
संसाधनों का बुद्धिमत्ता से उपयोग
बबीता ने देहरादून के सेंटर फॉर एरोमेटिक प्लांट्स (CAP) से पौधे मंगवाए और अपनी बचत से दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाकर सिंचाई की व्यवस्था की। उपकरण खरीदकर ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया और उत्पादन शुरू किया—गुलाबजल, हाइड्रोसोल, हल्दी, अदरक, मधु जैसे उत्पादों की शुरुआत इसी से हुई।
बाज़ार तक पहुंच
प्रारंभ में स्थानीय बिक्री सीमित रही और लागत अधिक थी, लेकिन बाद में ग्रामीण व्यवसायिक इनक्यूबेटर (RBI) से जुड़ने के बाद मार्केटिंग व प्रशिक्षण में मदद मिली, जिससे दिल्ली जैसे शहरों तक उत्पाद पहुंचने लगे।
शुद्धता एवं जैविकता की पहल
मधुमक्खी पालन शुरू कर हिमालयी शुद्ध शहद का उत्पादन किया—100% जैविक और रसायन-मुक्त खेती बबीता की पहचान बनी। आज 11 स्थायी कर्मचारियों के साथ-साथ आसपास के गाँव की महिलाएँ भी इस पहल से जुड़ रही हैं।
समुदाय में बदलाव
उन्होंने टीम में ‘स्वामित्व की भावना’ विकसित की, मासिक बैठकें आयोजित कीं और प्रदर्शन मूल्यांकन से कार्यकुशलता बढ़ाई। बबीता के प्रयासों से पलायन धीमा हुआ, सकारात्मक सोच का प्रसार हुआ और गाँव में रोजगार के अवसर बढ़े।
आगामी उद्देश्य: एग्रो-टूरिज्म
आगे का लक्ष्य एग्रो-टूरिज्म को बढ़ावा देना है, जहाँ पर्यटक खेती, ट्रेकिंग और नदी राफ्टिंग जैसी गतिविधियों का आनंद ले सकें—यह न केवल रोजगार बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगा।
—
विश्लेषण:
बबीता का मॉडल समेकित ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, और स्थानीय संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग का मिसाल है। कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने दीर्घकालिक सोच अपनाकर पूरे समुदाय का स्वरूप बदला। उनका यह प्रयास रोजगार सृजन, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक विकास का सशक्त उदाहरण है।
—
संभावित आकर्षक शीर्षक:
“पहाड़ों की बुलंद पहल: बबीता सिंह ने बदला पसमा गाँव, महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर”
“बाबीता की खेती, महिलाओं की उन्नति: कृषि से एग्रो-टूरिज्म तक का सफर”
“रोज़मेरी से रिमोट गांव की पहचान तक: बबीता का सशक्त गांव मॉडल”