चेन्नई, 19 अगस्त 2025 – ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने एक सुरक्षा शिकायत का निराकरण करने के बजाय AI टूल का प्रयोग कर तस्वीर को छेड़छाड़ करके ही उसे बंद कर दिया, जिससे सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।
क्या हुआ?
पेरुंगुड़ी क्षेत्र के स्कूल के पास एक सड़क पर खुले बिजली के तारों को लेकर शिकायतकर्ता पी. कन्नदासन ने GCC के एक सहायक कार्यकारी अभियंता (AEE) को ऑनलाइन शिकायत की, उस स्थान की तस्वीर भी साझा की। लेकिन, शिकायत का वास्तव में समाधान न होने के बावजूद, अधिकारी ने AI इरेज़र टूल से तस्वीर में वाहनों और अन्य वस्तुओं को हटा दिया — तार जस के तस बने रहे — और फोटो को शिकायत निपटने के प्रमाण के रूप में उपयोग कर फ़ाइल बंद कर दी। ग़लत तरीके से हटाए गए हिस्सों में धुंधले निशान और परछाइयाँ स्पष्ट दिखाई देती थीं ।
अधिकारियों का रुख
AEE मनोहरन ने दावा किया कि उन्हें शिकायत की जानकारी नहीं थी, यह शिकायत राजमार्ग विभाग का मामला है, और उन्होंने कोई AI उपयोग नहीं किया ।
पेरुंगुड़ी जोन के अध्यक्ष S. V. रविचंद्रन ने विश्वास बहाल करने की कोशिश की और सुनिश्चित किया कि दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी ।
इससे पहले भी उठे थे सवाल
इससे पहले मई में एक मैलापोर निवासी ने GCC की शिकायत प्रणाली पर सवाल उठाया था, वहाँ एक फुटपाथ अन्यायपूर्वक चाय की दुकान द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा था। शिकायत दर्ज होने के बाद भी अधिकारियों ने पुराने या दूसरी जगह की फोटो लगाकर उसे समाधान दिखा कर बंद कर दिया था—यह मामला भी काफी चर्चा में रहा ।
निष्कर्ष
यह मामला तकनीक की शक्ति और सार्वजनिक विश्वसनीयता के बीच एक संवेदनशील संतुलन को उभारता है। AI टूल्स से कामगार और जवाबदेही की कमी आसानी से छिप सकती है। लेकिन जब ये उपकरण भ्रष्ट तरीके से उपयोग की जाएं — जैसे कि शिकायत को सुलझाए बिना, फोटो एडिट कर कर खत्म कर देना — तो यह लोकतन्त्र और नागरिक विश्वास दोनों के लिए खतरा बन जाता है। अधिकारियों की जवाबदेही, शिकायत प्रणाली में सुधार, और पारदर्शिता जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए अति आवश्यक है।