ध्वजारोहण समारोह को लेकर मंदिर परिसर सहित पूरे शहर में सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं को पूरी तरह चाक-चौबंद कर दिया गया है।
मंदिर-शिखर पर फहराए जाने वाले केसरिया ध्वज में ‘ॐ’, सूर्य एवं कोविदार वृक्ष जैसे प्रतीकों का समावेश रहेगा। यह प्रतीक-चिन्ह हिंदू परंपरा व धर्म शास्त्र से जुड़े हैं।
कार्यक्रम की तैयारियों में शामिल है — मेहमानों के लिए विशेष ब्लॉक बनाए गए हैं, राहत-सेवाओं का संचालन किया गया है तथा स्वागत-कार्य के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जोनवार तैनात होंगी।
यह ध्वजारोहण सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे पूरे देश में एक सांस्कृतिक-विजय का प्रतीक माना जा रहा है। वर्षों से चली आ रही प्रतीक्षा, पूजा-अर्चना और निर्माण प्रक्रिया के बाद यह क्षण मानो “रामराज्य” के आदर्शों की ओर एक कदम है।
लालसमारोह के दिन बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु, अतिथि तथा अधिकारी उपस्थित रहेंगे — इसलिए प्रशासन ने ट्रैफिक प्रबंध, प्रवेश-नियंत्रण, चिकित्सा-व्यवस्था और सुरक्षा-चौकसी को विशेष महत्व दिया है।




