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राजधानी दिल्ली में हुए धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक उत्तराखंड में आतंकवादियों के कदमों के निशानों को ट्रैक किया है।

Uttarakhand राज्य में सीधे रूप से बड़ी आतंकी घटना सामने नहीं आई, लेकिन पिछले तीन-चार दशकों में यहाँ “शेदेखल” रूप में कई आतंक-संबंधित नेटवर्क सक्रिय रहे।

राज्य में 1990 के दशक से ही Khalistan Liberation Force एवं अन्य समूह-संबंधित गतिविधियों की रिपोर्ट मिलती रही है।

उदाहरण के लिए, 10 सितंबर 2018 को धारचूला (उत्तराखंड) से एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया था।

जून 2019 में ऊधमसिंह नगर से हथियार जुटाने-सप्लाई करने वाले एक आरोपी गिरफ्तार हुए थे।

राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर नियमित रूप से खुफिया जानकारी जुटा-साझा की है ताकि उत्तराखंड “पनाहगाह” न बन सके।

राज्य में कोई बड़ी कार्रवाई अभी सामने नहीं आई, लेकिन यह स्पष्ट है कि सुरक्षा एजेंसियाँ इसे पूर्वक्षेत्र के रूप में नहीं देख रही हैं, बल्कि सक्रिय निगरानी व ट्रैकिंग की स्थिति बनाए हुई है। इस सुरक्षा नेटवर्क की गहरी व लम्बी पृष्ठभूमि है — जिसमें पिछले बीस-तीस वर्षों से निरंतर पकड़ एवं ऑपरेशन शामिल हैं।

मौजूदा स्थिति में अधिकारियों को निम्न-बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना होगा:

सामाजिक-माध्यमों पर कट्टरपंथी विचारों के प्रचार-प्रसार की सक्रिय निगरानी।

सीमावर्ती इलाकों व सीमांत जनसंख्या वाले जिलों में सुरक्षा-शिक्षा कार्यक्रम सक्रिय करना।

नागरिकों को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने में प्रोत्साहित करना।

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