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पहला चंद्रग्रहण 2026: होली के दिन खगोलीय तमाशा, सूतक काल से मंदिरों के कपाट रहेंगे बंद

देहरादून/उत्तराखंड, 28 फरवरी 2026: इस साल का पहला चंद्रग्रहण तीन मार्च 2026 (मंगलवार) को फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा। खगोलीय दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण घटना है, जो भारत समेत कई हिस्सों में दिखाई देगी।

विशेषज्ञों के अनुसार चंद्रग्रहण दोपहर 3:20 बजे सेशुरू होगा और शाम 6:47 बजे तक जारी रहेगा, अर्थात इसका कुल प्रभाव लगभग 3 घंटे 27 मिनट का रहेगा। भारतीय समयानुसार इसी अवधि में आकाशीय पिंड पृथ्वी की छाया से गुजरते हुए दिखाई देगा।

चूँकि यह ग्रहण भारत में भी दृश्य रहेगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सूतक काल तीन मार्च की सुबह लगभग 6:20 बजे से प्रारंभ हो जाएगा और ग्रहण समाप्त होने तक जारी रहेगा। इस दौरान परंपरा अनुसार मांगलिक कार्य, पूजा-पाठ, भोजन, यात्राएँ और शुभ कार्य वर्जित माना जाता है, तथा कई मंदिरों में कपट बंद रखे जाएंगे।

ग्रहण के समय चंद्रमा लाल रंग का दिखाई दे सकता है, जिसे खगोलीय भाषा में “ब्लड मून” भी कहा जाता है। यह प्राकृतिक घटना न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से रोचक है बल्कि सांस्कृतिक तथा धार्मिक महत्व भी रखती है।

दूसरी ओर, वैज्ञानिक समुदाय इसे सूर्य-पृथ्वी-चंद्रमा के साम्य से होने वाली सामान्य खगोलीय प्रक्रिया के रूप में देखते हैं और इसे सुरक्षित रूप से बिना किसी विशेष सुरक्षा उपकरण के नंगी आँखों से भी देखा जा सकता है।

📌 मुख्य बिंदु:

• चंद्रग्रहण की तारीख: 3 मार्च 2026

• ग्रहण समय: दोपहर 3:20 से शाम 6:47 बजे तक

• सूतक काल: सुबह लगभग 6:20 बजे से ग्रहण तक

• धार्मिक परंपरा के अनुसार वर्जित कार्यों में पूजा-पाठ, शुभ कार्य एवं यात्राएँ शामिल

यह चंद्रग्रहण खगोलीय सौंदर्य और सांस्कृतिक अर्थों से भरा एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेगा, जिसे वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोणों से समझा जा रहा है।

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