रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) के नवीनतम आंकड़ों पर आधारित है।
• हिमालयी हिस्सों में वर्ष 2020–21 से 2024–25 तक कुल 661 हिमस्खलन घटनाएँ दर्ज की गईं, जिसका औसत हर साल लगभग 132 हिमस्खलन है।
• जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक 500 हिमस्खलन रिकॉर्ड हुए, जबकि हिमाचल प्रदेश में 150 और उत्तराखंड में 10 बड़े हिमस्खलन दर्ज किए गए।
• सिक्किम में सबसे कम औसतन केवल एक हिमस्खलन दर्ज हुआ है।
आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में लगभग 1,000 संभावित हिमस्खलन स्थल, हिमाचल में 200 और उत्तराखंड में 100 चिह्नित स्थान पहचाने गए हैं, जहाँ निगरानी और चेतावनी प्रणालियाँ लागू हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमस्खलन की घटनाओं को लेकर वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है, क्योंकि सुदूर mountainous इलाकों से सभी घटनाओं का पूर्ण रूप से रिपोर्टिंग नहीं होती। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फबारी के पैटर्न में तेजी आई है, जिससे हिमस्खलन का जोखिम बढ़ रहा है।
हिमस्खलन की चुनौती
हिमस्खलन न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना और पर्वतारोहियों के लिए खतरा पैदा करते हैं, बल्कि स्थानीय गाँवों, सड़कों और बुनियादी ढांचे को भी प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर पूर्वानुमान, निगरानी नेटवर्क और जागरूकता आवश्यक है ताकि जोखिम को कम किया जा सके।




